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Showing posts from January, 2025

86. प्रभु के लिए भाव

प्रभु केवल हमारा प्रेम भाव देखते हैं और प्रेम के कारण रीझ जाते हैं । कभी-कभी प्रभु प्रेम की प्रबलता देखने पर अटपटी बातों पर भी रीझ जाते हैं । एक महिला थी जो प्रभु की भक्त थी और प्रभु की खूब सेवा-पूजा करती थी । वह प्रभु को नित्य याद करती रहती थी । एक बार उसे दोपहर में ही हिचकी आने लगी और कुछ देर में उसकी बेटी ससुराल से उससे मिलने आ पहुँची । महिला ने हिचकी की बात बताई तो उसकी बेटी ने कहा कि मैं ही तुम्हें याद कर रही थी इसलिए तुम्हें हिचकी आ रही थी । बेटी मिलकर वापस चली गई । महिला सोच में पड़ गई कि मैं तो प्रभु को आठों याम याद करती रहती हूँ तो प्रभु को भी हिचकी आती होगी और तकलीफ होती होगी । महिला ने निश्चय किया कि प्रभु को तकलीफ न हो इसलिए आज से मैं प्रभु को याद नहीं करूंगी । प्रभु उस महिला की इस बात से रीझ गए कि प्रभु को तकलीफ न हो इसकी कितनी चिंता महिला को है । प्रभु ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया और अपने में लीन करके अपने धाम ले गए ।

72. संत स्वभाव

भक्ति के कारण भगवान से जुड़े होने के कारण सद्गुणों की प्रधानता संतों और भक्तों में पाई जाती है । यह उनके ऊपर प्रभु की कृपा प्रसादी होती है कि उनका स्वभाव ऐसा होता है जो प्रभु को प्रिय लगे । संसारी का स्वभाव ऐसा होता है जो उसके परिवार को भी प्रिय नहीं लगता, प्रभु को लगना तो बहुत दूर की बात है । एक संत सरोवर के जल में उतरकर आधे शरीर को जलमग्न करके मंत्र पाठ कर रहे थे । पास ही एक संसारी व्यक्ति सरोवर में नहा रहा था । संत को एक बिच्छू ने हाथों में डंक मारा तो उनका ध्यान गया कि बिच्छू सरोवर के जल में डूब रहा है । वे उसे पकड़कर सरोवर के बाहर छोड़ने का प्रयत्न करने लगे । जैसे ही संत अपने हाथों से बिच्छू को पकड़ते वह डंक मारता और संत के हाथों से छूट जाता । संत फिर उसे पकड़ने की कोशिश करते ताकि वे उसे सरोवर के पानी से निकालकर सुरक्षित भूमि में पहुँचा सके । बिच्छू फिर पकड़ने पर डंक मारता और संत के हाथ से छूट जाता । आखिरकार संत ने दोनों हाथों से बिच्छू को पकड़कर डंक के दर्द की परवाह किए बिना उसे सरोवर से बाहर निकाल दिया । सरोवर में जो व्यक्ति नहा रहा था वह यह पूरा नजारा देख रहा था । उसने संत से...

71. प्रभु पर विश्वास

मनुष्य के अलावा जो पशु पक्षी भी प्रभु पर विश्वास करते हैं उनका अमंगल कभी नहीं होता । यह शाश्वत सिद्धांत है । एक संत एक कथा सुनाते थे । एक नीम के पेड़ पर ढेर सारे कौवे रहते थे । एक रात एक तोता आया और कहा कि मौसम खराब है और वह राह भटक गया है इसलिए एक रात का आश्रय दे दें । कौवों ने मना कर दिया और कहा कि यह नीम का पेड़ हमारा है । तोता ने विनम्रता से कहा कि पेड़ तो सभी प्रभु के होते हैं पर कौवों ने उसे भगा दिया । तोता कुछ दूर पर एक आम के वृक्ष में जाकर बैठा । तभी घनघोर वर्षा हुई और बड़े-बड़े ओले गिरने लगे । तोता जिस आम की डाली पर बैठा था वह टूटकर गिरी और तोता डाल टूटने की वजह से डाल की जगह के खोखले स्थान में अपने आप जाकर लुढ़क   गया । ओले की मार से नीम के पेड़ के बहुत सारे कौवे घायल होकर जमीन पर गिर गए, कुछ तो मर भी गए पर तोता खोखली डाल में छिपे होने के कारण बच गया । उसका कुछ भी नहीं बिगड़ा । एक भी ओला या व र्षा की बूंद ने उसे छुआ तक नहीं । तोता रात भर आराम से प्रभु का सिमरन करता रहा और सुबह जब वर्षा रुक गई , ईश्वर को प्रणाम करके आकाश में उड़ गया । भरोसा होने के कारण प्रभु ने उस तो...