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Showing posts from April, 2023

86. प्रभु के लिए भाव

प्रभु केवल हमारा प्रेम भाव देखते हैं और प्रेम के कारण रीझ जाते हैं । कभी-कभी प्रभु प्रेम की प्रबलता देखने पर अटपटी बातों पर भी रीझ जाते हैं । एक महिला थी जो प्रभु की भक्त थी और प्रभु की खूब सेवा-पूजा करती थी । वह प्रभु को नित्य याद करती रहती थी । एक बार उसे दोपहर में ही हिचकी आने लगी और कुछ देर में उसकी बेटी ससुराल से उससे मिलने आ पहुँची । महिला ने हिचकी की बात बताई तो उसकी बेटी ने कहा कि मैं ही तुम्हें याद कर रही थी इसलिए तुम्हें हिचकी आ रही थी । बेटी मिलकर वापस चली गई । महिला सोच में पड़ गई कि मैं तो प्रभु को आठों याम याद करती रहती हूँ तो प्रभु को भी हिचकी आती होगी और तकलीफ होती होगी । महिला ने निश्चय किया कि प्रभु को तकलीफ न हो इसलिए आज से मैं प्रभु को याद नहीं करूंगी । प्रभु उस महिला की इस बात से रीझ गए कि प्रभु को तकलीफ न हो इसकी कितनी चिंता महिला को है । प्रभु ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया और अपने में लीन करके अपने धाम ले गए ।

30. प्रभु की कृपा की प्रतीक्षा

प्रभु की कृपा की प्रतीक्षा और इंतजार करने वाले को प्रभु की कृपा निश्चित जीवन में मिलती है । पर जो प्रभु की कृपा की प्रतीक्षा नहीं करता और निराश होकर चला जाता है वह प्रभु कृपा से वंचित रह जाता है । एक व्यक्ति रोज दफ्तर से 7 बजे घर आता और दुकान से बिस्कुट के कुछ पैकेट ला कर घर के बाहर कुत्तों को खिला देता । ऐसा नियम हो गया तो रोज 7 बजे उसके घर के बाहर कुत्ते उसका इंतजार करते । वह रोज आता और बिस्कुट खिलाता था । एक दिन दफ्तर में किसी कारणवश उसके मालिक ने उसे बहुत डांटा । उसका मूड खराब होने के कारण और विलंब भी होने के कारण वह बिस्कुट लेकर नहीं आया और देखा कि कुत्ते इंतजार में बैठे हैं । मूड खराब था इसलिए सीधे वह घर में जाकर बिस्तर पर लेट गया । रात 9 बजे उसने दरवाजा खोलकर देखा तो सभी कुत्ते चले गए थे बस एक कुत्ता इंतजार में बैठा था । उसे बहुत दया आ गई और वह घर पर उपलब्ध बिस्कुट का बड़ा डब्बा लेकर बाहर आया और इकलौते कुत्ते को जो निराश होकर नहीं गया था और प्रतीक्षा कर रहा था उसे भरपेट बिस्कुट खिला ए । इंतजार का फल मीठा होता है और प्रभु कृपा के इंतजार का फल तो असीम होता है । इंतजार और विश्व...

29. असली नाम वाली माता आ गई

जब हम प्रभु और माता को पुकारते हैं तो विपत्ति में या दुविधा में प्रभु और माता स्वयं बिना इंतजार किए हुए हमारी पुकार को सुनकर आते हैं । एक हवेली में पुराने समय में एक सेठजी रहा करते थे जिनका नाम श्रीरामचंद्र था और उनकी पत्नी का नाम जानकी देवी थी । दोनों बड़े भक्त थे और बड़े भक्ति भाव से प्रभु और माता की पूजा करते थे । वे उनके बूढ़े पिता की सेवा भी करते थे । एक बार बूढ़े पिता रात में गर्मी के समय छत पर सो रहे थे कि उनको प्यास लगी और देखा कि पानी खत्म हो चुका है । वे चलने में असमर्थ थे कि चलकर रसोई से पानी ले आए, इसलिए उन्होंने अपनी बहू जानकी को आवाज लगाई । उनकी बहू जानकी गहरी नींद सो रही थी पर उन की ठाकुरबाड़ी में सेवित प्रभु श्री रामचंद्रजी और भगवती जानकी माता ने उनकी पुकार तत्काल सुनी और भगवती जानकी माता मंदिर का जल पात्र लेकर उन्हें जल पिलाने आई । जब सुबह उनकी बहू आई तो बूढ़े पिता ने कहा कि रात का पानी कितना मीठा और स्वादिष्ट था, कहाँ से लाई थी । बहु रानी ने कहा कि मैं तो रात में पानी पिलाने आई ही नहीं, मैं तो सोई हुई थी तब बहुरानी ने मंदिर के पानी की झा री देखी तो समझते देर नहीं ल...