Skip to main content

Posts

Showing posts from November, 2023

86. प्रभु के लिए भाव

प्रभु केवल हमारा प्रेम भाव देखते हैं और प्रेम के कारण रीझ जाते हैं । कभी-कभी प्रभु प्रेम की प्रबलता देखने पर अटपटी बातों पर भी रीझ जाते हैं । एक महिला थी जो प्रभु की भक्त थी और प्रभु की खूब सेवा-पूजा करती थी । वह प्रभु को नित्य याद करती रहती थी । एक बार उसे दोपहर में ही हिचकी आने लगी और कुछ देर में उसकी बेटी ससुराल से उससे मिलने आ पहुँची । महिला ने हिचकी की बात बताई तो उसकी बेटी ने कहा कि मैं ही तुम्हें याद कर रही थी इसलिए तुम्हें हिचकी आ रही थी । बेटी मिलकर वापस चली गई । महिला सोच में पड़ गई कि मैं तो प्रभु को आठों याम याद करती रहती हूँ तो प्रभु को भी हिचकी आती होगी और तकलीफ होती होगी । महिला ने निश्चय किया कि प्रभु को तकलीफ न हो इसलिए आज से मैं प्रभु को याद नहीं करूंगी । प्रभु उस महिला की इस बात से रीझ गए कि प्रभु को तकलीफ न हो इसकी कितनी चिंता महिला को है । प्रभु ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया और अपने में लीन करके अपने धाम ले गए ।

44. प्रभु सबके पालनहार

हम कितने बड़े आदमी क्यों न हो पर हमारे पालनहार तो प्रभु ही हैं । बड़े-से-बड़े पद और प्रतिष्ठा वाले अमीर आदमी और एक छोटी-सी चींटी सबके पालनहार प्रभु हैं । एक सेठजी एक मंदिर के पुजारीजी से किसी बात पर रुष्ट हो गए और डांटकर उनसे कहा कि तुम्हारा पेट मंदिर में मेरे द्वारा चढ़ाए रुप यों से भरता है । पुजारीजी भक्त हृदय थे तो विनम्र होकर कहा कि प्रभु ही मेरा पेट भरते हैं और मेरा ही नहीं सभी का पेट भरते हैं । सेठजी ने कहा कि अगर मैं कमाऊ नहीं और आज जंगल में जाकर बैठ जाऊं तो क्या तुम्हारे प्रभु मेरा पेट भरेंगे ? पुजारीजी ने कहा जरूर । सेठजी एक जंगल में चले गए और पेड़ पर चढ़ गए । दोपहर में एक यात्री आया, पेड़ के नीचे सोया और विश्राम के बाद उठकर गया तो एक थैला भूलकर छोड़ गया । सेठजी यह सब देख रहे थे । उन्हें जोर से भूख लग चुकी थी क्योंकि सुबह से वे पेड़ पर बैठे थे और दोपहर का समय हो चला था । कौतूहल में पेड़ से नीचे उतर कर सेठजी ने थैला देखा तो उसमें गरमा- गरम भोजन था । सेठजी ने भोजन किया और तुरंत मंदिर में जाकर पुजारीजी के पैर पकड़े और कहा कि वे मान गए कि जगत के पालनहार प्रभु ही हैं क्योंकि उन...

43. प्रभु को भक्तों की चिंता

प्रभु को अपने प्रिय भक्तों की भरपूर चिंता होती है और प्रभु उनकी रक्षा करने में और उनका मंगल करने में कोई कसर नहीं छोड़ते । बस हमें प्रभु पर पूर्ण विश्वास होना चाहिए और विपत्ति में चिंता नहीं बल्कि प्रभु का चिंतन करना चाहिए । एक हवाई जहाज में बहुत यात्रियों के बीच करीब 10 वर्ष की एक नन्हीं बच्ची सफर कर रही थी । अचानक मौसम बदला और हवाई जहाज डगमगाने लगा । सभी यात्री चिंतित हो गए और प्रभु को याद करने लगे क्योंकि उन्हें मौत का डर लग रहा था । पर वह बच्ची शांत रहकर मुस्कुरा रही थी । करीब आधे घंटे तक भयंकर तूफान में डगमगाने के बाद जब पायलट ने घोषणा की कि आप हम खतरे से बाहर निकल गए तो सभी ने राहत की सांस ली । बगल में बैठे एक व्यक्ति ने उस 10 वर्षीय मुस्कुरा ती हु ई बच्ची को पूछा कि क्या तुम्हें डर नहीं लगा क्योंकि तुम तो पूरे समय मुस्कुरा रही थी । बच्ची ने बड़ा मार्मिक जवाब दिया कि हवाई जहाज चलाने वाले पायलट मेरे पिताजी हैं और उन्हें पता है कि उनकी बेटी प्लेन में बैठी है तो वह अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे । ऐसा विश्वास विपत्ति काल में हमें भी परमपिता प्रभु पर होना चाहिए ...