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Showing posts from April, 2025

86. प्रभु के लिए भाव

प्रभु केवल हमारा प्रेम भाव देखते हैं और प्रेम के कारण रीझ जाते हैं । कभी-कभी प्रभु प्रेम की प्रबलता देखने पर अटपटी बातों पर भी रीझ जाते हैं । एक महिला थी जो प्रभु की भक्त थी और प्रभु की खूब सेवा-पूजा करती थी । वह प्रभु को नित्य याद करती रहती थी । एक बार उसे दोपहर में ही हिचकी आने लगी और कुछ देर में उसकी बेटी ससुराल से उससे मिलने आ पहुँची । महिला ने हिचकी की बात बताई तो उसकी बेटी ने कहा कि मैं ही तुम्हें याद कर रही थी इसलिए तुम्हें हिचकी आ रही थी । बेटी मिलकर वापस चली गई । महिला सोच में पड़ गई कि मैं तो प्रभु को आठों याम याद करती रहती हूँ तो प्रभु को भी हिचकी आती होगी और तकलीफ होती होगी । महिला ने निश्चय किया कि प्रभु को तकलीफ न हो इसलिए आज से मैं प्रभु को याद नहीं करूंगी । प्रभु उस महिला की इस बात से रीझ गए कि प्रभु को तकलीफ न हो इसकी कितनी चिंता महिला को है । प्रभु ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया और अपने में लीन करके अपने धाम ले गए ।

76. सबका पोषण प्रभु से

प्रभु ही सबका पोषण करते हैं । प्रभु निमित्त किसी को भी बनाते हैं पर पीछे से करने वाले तो केवल और केवल प्रभु ही होते हैं । प्रभु थलचर, जलचर, नभचर और वनस्पति सभी का पोषण करते हैं और ऐसे अनंत कोटि ब्रह्मांड के जीवों का रोजाना पोषण करते हैं । एक बार एक राज्य में अ काल पड़ा । वहाँ का राजा ब ड़े दयालु स्वभाव का था । उसने राजकोष के द्वार खोल दिए और सभी प्रजा को अ काल की आपदा में राहत दी । उसे इसका अभिमान हो गया कि उसके कारण कितने लोगों का पोषण हुआ । उस राजा के गुरुजी ने यह भां प लिया और राजा को लेकर एक जंगल में गए जो उसके राज्य की सीमा के भीतर था । वहाँ एक बड़ी शिला को हटाया तो एक  हृष्ट-पुष्ट  मेंढक बैठा था । गुरुजी ने राजा से पूछा कि क्या तुमने इसका भी अपने खजाने से पोषण किया ? राजा अपने गुरुजी का इशारा तुरंत समझ गया और लज्जित हुआ । गुरुजी ने कहा कि असंख्य जीव, जंतु, कीड़े, मकोड़े से लेकर बड़े-बड़े जीव जो जंगल में रहते हैं उनका नित्य पोषण प्रभु ही करते हैं । राजा ने भी जो राजकोष खोलकर और जनता को धन सामग्री बां टी वह भी प्रभु प्रेरणा से ही संभव हो सका । राजा तो निमित्त मात्र ह...