प्रभु केवल हमारा प्रेम भाव देखते हैं और प्रेम के कारण रीझ जाते हैं । कभी-कभी प्रभु प्रेम की प्रबलता देखने पर अटपटी बातों पर भी रीझ जाते हैं । एक महिला थी जो प्रभु की भक्त थी और प्रभु की खूब सेवा-पूजा करती थी । वह प्रभु को नित्य याद करती रहती थी । एक बार उसे दोपहर में ही हिचकी आने लगी और कुछ देर में उसकी बेटी ससुराल से उससे मिलने आ पहुँची । महिला ने हिचकी की बात बताई तो उसकी बेटी ने कहा कि मैं ही तुम्हें याद कर रही थी इसलिए तुम्हें हिचकी आ रही थी । बेटी मिलकर वापस चली गई । महिला सोच में पड़ गई कि मैं तो प्रभु को आठों याम याद करती रहती हूँ तो प्रभु को भी हिचकी आती होगी और तकलीफ होती होगी । महिला ने निश्चय किया कि प्रभु को तकलीफ न हो इसलिए आज से मैं प्रभु को याद नहीं करूंगी । प्रभु उस महिला की इस बात से रीझ गए कि प्रभु को तकलीफ न हो इसकी कितनी चिंता महिला को है । प्रभु ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया और अपने में लीन करके अपने धाम ले गए ।
सुख और दुःख सबके जीवन में आते हैं । सभी को जीवन में किसी-न-किसी समय सुख या दुःख का सामना करना पड़ता है । संतों और भक्तों ने सुख से ज्यादा दुःख की महिमा बताई है । एक संत एक कथा सुनाते थे । एक बार अचानक एक मोड़ पर सुख और दुःख की मुलाकात हो गई । दुःख ने सुख से कहा कि तुम कितने भाग्यशाली हो कि संसार के लोग तुम्हें प्राप्त करने की कोशिश में जीवन भर लगे रहते हैं । सुख असली बात जानता था और उसने बड़े विनम्र होकर दुःख को बड़ा मार्मिक उत्तर दिया । सुख ने मुस्कुराते हुए दुःख से कहा कि भाग्यशाली मैं नहीं तुम हो । दुःख ने हैरानी से पूछा कैसे ? तो सुख ने ब ड़ी ईमानदारी से सच्चा जवाब दिया । सुख ने कहा कि मुझे पाकर सभी लोग प्रभु को भूल जाते हैं और मेरा उपभोग करने में ही जीवन और यहाँ तक कि बुढ़ापा भी बिता देते हैं । पर इसके ठीक विपरीत तुम्हें पाकर लोग तुरंत प्रभु को याद करते हैं और प्रभु की शरण में चले जाते हैं । तो जो प्रभु को बिसरा दे वह बड़ा या जो प्रभु से मिला दे वह बड़ा । इसलिए ही संतों और भक्तों ने जीवन में दुःख का सहर्ष स्वीकार किया और प्रभु प्राप्ति में सहयोग के लिए दुःख को धन्यवाद दिया है ।