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Showing posts from October, 2023

86. प्रभु के लिए भाव

प्रभु केवल हमारा प्रेम भाव देखते हैं और प्रेम के कारण रीझ जाते हैं । कभी-कभी प्रभु प्रेम की प्रबलता देखने पर अटपटी बातों पर भी रीझ जाते हैं । एक महिला थी जो प्रभु की भक्त थी और प्रभु की खूब सेवा-पूजा करती थी । वह प्रभु को नित्य याद करती रहती थी । एक बार उसे दोपहर में ही हिचकी आने लगी और कुछ देर में उसकी बेटी ससुराल से उससे मिलने आ पहुँची । महिला ने हिचकी की बात बताई तो उसकी बेटी ने कहा कि मैं ही तुम्हें याद कर रही थी इसलिए तुम्हें हिचकी आ रही थी । बेटी मिलकर वापस चली गई । महिला सोच में पड़ गई कि मैं तो प्रभु को आठों याम याद करती रहती हूँ तो प्रभु को भी हिचकी आती होगी और तकलीफ होती होगी । महिला ने निश्चय किया कि प्रभु को तकलीफ न हो इसलिए आज से मैं प्रभु को याद नहीं करूंगी । प्रभु उस महिला की इस बात से रीझ गए कि प्रभु को तकलीफ न हो इसकी कितनी चिंता महिला को है । प्रभु ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया और अपने में लीन करके अपने धाम ले गए ।

42. प्रभु प्रत्यक्ष आते हैं

वैसे तो प्रभु अपने संकल्प मात्र से ब्रह्मां डों का निर्माण, संचालन और लय कर सकते हैं पर अपने प्रेमी भक्तों के लिए उन्हें प्रत्यक्ष आना ही पड़ता है । पुराने समय की बात है । एक गाँव में एक मंदिर में श्रीराम दरबार की सेवा थी और कुछ संत वहाँ रहते थे और सेवा, कीर्तन, जप और पूजा करते थे । जो भी मंदिर में दिन भर में चढ़ावा आता था उ से बनिए की दुकान में भेजकर राशन मंगा लेते थे और प्रभु को भोग लगाकर प्रसाद रूप में उसे ग्रहण कर लेते थे । एक बार दो दिनों तक कोई चढ़ावा नहीं आया । संत बनिए की दुकान में उधार सामान लेने गए ताकि प्रभु को भोग लग जाए पर बनिए ने उधार देने से साफ मना कर दिया । संतों ने प्रभु को जल का भोग लगाया और स्वयं भी जल पीकर सो गए । रात को चार बालक बनिए के घर पहुँचे और कहा कि उनके पी तांबर में बारह स्वर्ण मोहरे हैं जिससे रोजाना वर्ष भर तक मंदिर में राशन भिजवाने की व्यवस्था करनी है । सुबह बनिया राशन और पी तांबर लेकर मंदिर पहुँचा और रात की पूरी बात बताई और क्षमा याचना की और कहा कि उसे इतना धन उसे प्राप्त हो गया है कि वह पूरे वर्ष राशन भेजता रहेगा । जब संतों ने पी तांबर देखा तो उन्...

41. नया जन्म

प्रभु ने श्रीमद् भगवद् गीताजी में कहा है कि कोई दुराचारी-से-दुराचारी, पापी-से-पापी भी अगर प्रभु के समक्ष सच्चा पश्चाताप कर लेता है और अपनी गलती को जीवन में नहीं दोहराने का संकल्प भी कर लेता है तो उसका उसी शरीर में मानो नया जन्म हो जाता है क्योंकि प्रभु उसे क्षमा कर देते हैं । एक चोर ने राजमहल में चोरी की और चोरी का माल जंगल में गाढ़ दिया । राजा के सिपाही उसके पीछे लग गए । इसलिए उनसे बचने के लिए वह चोर एक मंदिर में जहाँ सत्संग चल रहा था वहाँ जाकर बैठ गया । वहाँ संत कह रहे थे कि अगर हम पाप का सच्चा पश्चाताप प्रभु के समक्ष कर लेते हैं और पाप करना भविष्य में हमेशा के लिए छोड़ देते हैं तो मानो हमारा उसी शरीर में नया जन्म हो जाता है । उस चोर ने तुरंत मंदिर में प्रभु के सामने सच्चा पश्चाताप किया और दोबारा जीवन में कभी चोरी नहीं करने का संकल्प भी किया । सत्संग विश्राम हुआ और वह बाहर निकला तो सिपा हि यों ने उससे पहचान कर पकड़ लिया और राजा के दरबार में पेश किया । राजा के पूछने पर चोर ने चोरी करने की बात से मना किया । तब राजा ने कहा कि इसके हाथ में गर्म लोहे की जंजीर रख दो अगर यह चोर हुआ तो इसका...