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Showing posts from May, 2024

86. प्रभु के लिए भाव

प्रभु केवल हमारा प्रेम भाव देखते हैं और प्रेम के कारण रीझ जाते हैं । कभी-कभी प्रभु प्रेम की प्रबलता देखने पर अटपटी बातों पर भी रीझ जाते हैं । एक महिला थी जो प्रभु की भक्त थी और प्रभु की खूब सेवा-पूजा करती थी । वह प्रभु को नित्य याद करती रहती थी । एक बार उसे दोपहर में ही हिचकी आने लगी और कुछ देर में उसकी बेटी ससुराल से उससे मिलने आ पहुँची । महिला ने हिचकी की बात बताई तो उसकी बेटी ने कहा कि मैं ही तुम्हें याद कर रही थी इसलिए तुम्हें हिचकी आ रही थी । बेटी मिलकर वापस चली गई । महिला सोच में पड़ गई कि मैं तो प्रभु को आठों याम याद करती रहती हूँ तो प्रभु को भी हिचकी आती होगी और तकलीफ होती होगी । महिला ने निश्चय किया कि प्रभु को तकलीफ न हो इसलिए आज से मैं प्रभु को याद नहीं करूंगी । प्रभु उस महिला की इस बात से रीझ गए कि प्रभु को तकलीफ न हो इसकी कितनी चिंता महिला को है । प्रभु ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया और अपने में लीन करके अपने धाम ले गए ।

56. प्रभु के लिए एक नियम

आजकल लोग सेहत को लेकर बहुत जागरूक हैं और प्रायः सुबह पार्क में टहलने जाते हैं । कोई दो किलोमीटर कोई तीन किलोमीटर तक सुबह पैदल चलता है । एक संत एक बहुत सुंदर संशोधन इस क्रम में बताते हैं । वे कहते हैं कि अगर घूमने का उद्देश्य मंदिर कर दिया जाए तो यह पूरा-का-पूरा कर्म भक्ति बन जाता है । अगर हमें तीन किलोमीटर सुबह चलना है तो एक ऐसे मंदिर का चयन करें जो आपके घर से डेढ़ किलोमीटर पर हो । मंदिर चलकर पहुँचे, प्रभु का दर्शन किया और चलकर वापस घर आ गए । इस तरह आपका चलना डेढ़ और डेढ़ मिलाकर तीन किलोमीटर हो गया और सुबह की मंगल बेला में प्रभु के दर्शन भी हो गए जिससे आपका पूरा दिन मंगलमय हो जाएगा । प्रभु इतने दयावान और कृपानिधि हैं कि आपको पांच मिनट के दर्शन का पुण्य नहीं बल्कि आपके घर से चलकर वापस घर आने में जितना समय लगा उतना पुण्य आपके खाते में लिख देते हैं । ऐसा इसलिए क्योंकि दयावान प्रभु यह मान लेते हैं कि आपने पैदल चलकर मंदिर आना और वापस जाना अपने प्रभु के लिए किया जबकि हमारा पैदल चलने का एक उद्देश्य स्वास्थ्य भी था । पर प्रभु उसे अनदेखा कर आने-जाने के पूरे समय का पुण्य आपके खाते में लिख द...

55. प्रभु नाम का प्रभाव

प्रभु नाम में प्रभु की सारी शक्तियां समाई हुई होती है । प्रभु ने अपने अवतार काल में जितनों का उद्धार किया प्रभु का नाम आज तक उससे भी कई गुना ज्यादा लोगों का उद्धार करता आ रहा है । एक प्राचीन कथा है । श्रीराम राज्य की स्थापना हो चुकी थी । श्री काशी नरेश एक बार प्रभु श्री रामजी से मिलने श्री अयोध्याजी पधारे । पहले उन्हें देवर्षि प्रभु श्री नारदजी मिले और उन्हें कहा कि राज्यसभा में सभी को प्रणाम करना पर ऋषि श्री विश्वामित्रजी को अनदेखा कर देना । श्री काशी नरेश ने ऐसा ही किया । ऋषि श्री विश्वामित्रजी रुष्ट हो गए और प्रभु श्री रामजी को शपथ देकर सूर्यास्त तक श्री काशी नरेश का वध करने का वचन ले लिया । श्री काशी नरेश भागे तो फिर देवर्षि प्रभु श्री नारदजी ने उन्हें भगवती अंजना माता की शरण में भेजा । भगवती अंजना माता ने अपने पुत्र प्रभु श्री हनुमानजी से श्री काशी नरेश को बचाने के लिए कहा । प्रभु श्री हनुमानजी प्रभु के नाम की महिमा को भली-भांति जानते थे और वे श्री काशी नरेश को लेकर वापस श्री अयोध्याजी में सरयू माता के पास गए और श्री काशी नरेश को सरयू माता के पावन जल में खड़े होकर लगातार श्रीरा...