प्रभु केवल हमारा प्रेम भाव देखते हैं और प्रेम के कारण रीझ जाते हैं । कभी-कभी प्रभु प्रेम की प्रबलता देखने पर अटपटी बातों पर भी रीझ जाते हैं । एक महिला थी जो प्रभु की भक्त थी और प्रभु की खूब सेवा-पूजा करती थी । वह प्रभु को नित्य याद करती रहती थी । एक बार उसे दोपहर में ही हिचकी आने लगी और कुछ देर में उसकी बेटी ससुराल से उससे मिलने आ पहुँची । महिला ने हिचकी की बात बताई तो उसकी बेटी ने कहा कि मैं ही तुम्हें याद कर रही थी इसलिए तुम्हें हिचकी आ रही थी । बेटी मिलकर वापस चली गई । महिला सोच में पड़ गई कि मैं तो प्रभु को आठों याम याद करती रहती हूँ तो प्रभु को भी हिचकी आती होगी और तकलीफ होती होगी । महिला ने निश्चय किया कि प्रभु को तकलीफ न हो इसलिए आज से मैं प्रभु को याद नहीं करूंगी । प्रभु उस महिला की इस बात से रीझ गए कि प्रभु को तकलीफ न हो इसकी कितनी चिंता महिला को है । प्रभु ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया और अपने में लीन करके अपने धाम ले गए ।
हमें प्रभु की भक्ति और भजन करने की आदत जीवन में बनानी चाहिए पर हम इस के ठीक विपरीत गलत चीजों की आदत बना लेते हैं जो हमें अंत में दुःख और क्लेश देकर जाती हैं । पुराने समय की बात है । कुछ गांव के बीच स्थित पहाड़ियों में एक डाकुओं का समूह रहता था । उसके मुखिया डाकू को पकड़ने के लिए पुलिस ने इनाम निकाल रखा था । पुलिस के खुफिया विभाग को पता चला कि डाकू अभी कुछ समय बाद कुछ बड़ी वारदात करने वाले हैं । तो एक पुलिस वाला डाकू ओं को पकड़ने के लिए उस जंगल में स्थित एक मंदिर में, जहाँ की कुछ संत रहते थे, वहाँ एक संत का रूप बनाकर रहने लगा । उसका मकसद था डाकू ओं का पता लगाना पर वह सुबह, दोपहर और शाम में मंदिर में संतों द्वारा किए जाने वाले सत्संग में हिस्सा लेने लग गया क्योंकि वह संत का ढोंग कर रहा था । दो महीने में सत्संग का प्रभाव ऐसा हुआ कि वह डाकू ओं का पता तो लगा चुका था पर वह अब सच्चा संत बन गया क्योंकि उसने मन से सत्संग का श्रवण किया था । उसने डाकुओं का पता अपने विभाग को दिया और फिर हमेशा के लिए नौकरी से इस्तीफा देकर संत बनकर उसी मंदिर में अन्य संतों के साथ रहने लग गया । सत्संग के प्रभाव ...