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65. तिलक का महत्व

पहले के लोग तिलक, माला, चोटी रखते थे पर आज पश्चिमी संस्कृति का बोलबाला होने पर यह लुप्तप्राय हो गया है तिलक को मस्तक पर लगाने का कितना बड़ा महत्व है यह एक प्रसंग से समझने में आता है

 एक व्यक्ति ने एक दुकानदार से तिलक की डिबिया की एक्सपायरी डेट (समाप्ति तिथि) पूछी वहीं पास में एक संत बैठे थे वे उठकर आए और एक बड़ा मार्मिक उत्तर उस व्यक्ति को दिया । संत बोले कि तिलक की डिबिया की कोई एक्सपायरी डेट नहीं है पर यह प्रभु की प्रसादी जिनके मस्तक पर तिलक के रूप में लगती है उस मस्तक की एक्सपायरी डेट बढ़ा देती है । इसलिए पहले के वैष्णव सदा घर से निकलने से पूर्व प्रभु का प्रसादी तिलक अपने मस्तक पर धारण करके निकलते थे । जैसे एक पतिव्रता स्त्री की पहचान उसके सिंदूर से होती है कि वह शादीशुदा है ऐसे ही प्रभु के आश्रित एक भक्त की पहचान उसके मस्तक पर प्रभु का प्रसादी तिलक लगाने से होती है ।