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63. उल्टी रेखाएं

चाहे कोई धनवान हो या गरीब सबको सातों सुख नहीं मिलते । सबके मस्तक पर उल्टी लकीर यानी रेखाएं होती ही हैं । किसी को पुत्र का सुख नहीं, किसी को धन की कमी है, किसी का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता, किसी को अन्य कोई अशांति रहती है ।

एक संत एक कथा सुनाते थे । वे कहते थे कि रबर स्टांप में शब्द और अंक उल्टे होते हैं पर जब वह स्याही में लगाकर कागज पर लगाए जाते हैं तो कागज पर सुलटे हो जाते हैं । वैसे ही जब हमारा मस्तक प्रभु के श्रीकमलचरणों में झुकता है और वहाँ की श्रीरज हमारे मस्तक पर लगकर फिर संसार पटल पर हमारा मस्तक लगता है तो ही वह सुलटा पड़ता है । नहीं तो उल्टी रेखाएं यानी धनहीनता, बीमारी, शोक, रोग, बिगड़े रिश्ते, बच्चों द्वारा परेशानी, व्यापार-नौकरी की दिक्कतें, अन्य अशांति इत्यादि हमें जीवन भर परेशान करके रखती हैं । पर जब साष्टांग दंडवत प्रणाम में हमारा मस्तक प्रभु के श्रीकमलचरणों में झुकता है तो हमारी उल्टी रेखाएं सुलटी हो जाती हैं । प्रभु को किया एक प्रणाम जीवन के कितने बड़े परिणाम को बदलने की क्षमता रखता है ।